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वैदिक ज्योतिष में केतु को एक ‘छाया ग्रह’ माना गया है। राहु यदि सर्प का मुख है, तो केतु सर्प की पूंछ है। केतु के पास मस्तिष्क नहीं है, केवल धड़ है, इसलिए यह तर्क (Logic) पर नहीं बल्कि अंतर्ज्ञान (Intuition) पर चलता है। इसे ‘मोक्षकारक’ ग्रह कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को सांसारिक…

वैदिक ज्योतिष में शनि (Saturn) को ‘न्यायाधीश’ और ‘कर्मफलदाता’ माना गया है। शनि सौरमंडल के सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं, इसलिए इनका प्रभाव बहुत गहरा और स्थायी होता है। जहाँ अन्य ग्रह सुख और विलासिता की ओर ले जाते हैं, वहीं शनि हमें जीवन की कड़वी सच्चाई, अनुशासन और मेहनत का पाठ…

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को ‘भार्गव’ और ‘दैत्यगुरु’ (गुरु ऑफ असुर) कहा जाता है। यदि गुरु बृहस्पति ज्ञान और धर्म के शिक्षक हैं, तो शुक्र ग्रह जीवन को जीने की कला, प्रेम और भौतिक सुख-सुविधाओं के शिक्षक हैं। शुक्र हमारी कुंडली में उस ‘मिठास’ और ‘चमक’ का प्रतिनिधित्व करता है जिसके बिना जीवन नीरस…

वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को ‘राजकुमार’ की उपाधि दी गई है। यह सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे निकटतम ग्रह है। बुध हमारी तार्किक क्षमता (Logic), वाणी (Speech), और बुद्धि (Intelligence) का प्रतिनिधित्व करता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध बलवान होता है, वह अपनी बातों से किसी का भी दिल…

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ‘भूमिपुत्र’ और ‘ग्रहों का सेनापति’ (Commander-in-Chief of Planets) कहा जाता है। यह हमारी शारीरिक ऊर्जा, साहस और इच्छाशक्ति (Willpower) का प्रतिनिधित्व करता है। यदि सूर्य राजा है, तो मंगल वह रक्षक है जो सीमाओं की रक्षा करता है। हमारे भीतर की संघर्ष क्षमता (Fighting spirit) और किसी भी कार्य…

वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) में चंद्र ग्रह को “मनसो जातकः” कहा गया है, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा हमारे मन (Mind) का कारक है। सूर्य यदि हमारी आत्मा (Soul) है, तो चंद्रमा हमारा मन और हमारी भावनाएँ (Emotions) हैं। यह पृथ्वी के सबसे निकट होने के कारण हमारे जीवन, स्वभाव (Nature) और शरीर के तरल…

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को “ग्रहों का राजा” और “जगत की आत्मा” माना गया है। जैसे सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, वैसे ही हमारी कुंडली के सभी योग सूर्य की शक्ति से ही प्रकाशित होते हैं। सूर्य को ‘पिता’, ‘सत्ता’, और ‘आरोग्य’ का कारक माना जाता है। यह हमारे भीतर के…

ज्योतिष में राहु और केतु को लेकर हमेशा जिज्ञासा, डर और रहस्य बना रहता है। अक्सर लोग कहते हैं“कुंडली में राहु-केतु दोष है, इसलिए जीवन उलझा हुआ है।” लेकिन सच यह है कि राहु-केतु दोष केवल डरने की चीज़ नहीं है। यह जीवन की उन परतों को खोलता है, जिन्हें हम आम तौर पर समझ…

वैदिक ज्योतिष में शनि (Saturn) को ‘कर्मफल दाता’ और ‘न्याय का देवता’ माना गया है। शनि की भूमिका एक कठोर शिक्षक जैसी है, जो व्यक्ति को उसके पिछले और वर्तमान कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि दोष तब उत्पन्न होता है जब कुंडली में शनि प्रतिकूल स्थिति में हों, या व्यक्ति शनि की…

वैदिक ज्योतिष सिर्फ ग्रह-नक्षत्रों की गणना का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के अदृश्य संतुलन, शरीर, मन और कर्म के रहस्यों को उजागर करने वाली सटीक पद्धति है। यह मान्यता रही है कि हर व्यक्ति की जन्म कुंडली केवल उसके भाग्य या स्वभाव की झलक नहीं देती, बल्कि स्वास्थ्य की संभावनाओं का दर्पण…