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परिचय (Introduction) जन्म कुंडली में प्रत्येक भाव (House) जीवन के किसी खास क्षेत्र को दर्शाता है। सातवाँ भाव इनमें से एक ऐसा भाव है, जो हमारी सामाजिक और व्यक्तिगत दोनों तरह की साझेदारियों (Partnerships) को बताता है। जहाँ पाँचवाँ भाव प्रेम (Love) को दर्शाता है, वहीं सातवाँ भाव विवाह (Marriage), साथीपन (Companionship), व्यापारिक साझेदारी (Business…

वैदिक ज्योतिष में छठा भाव (षष्ठम भाव) ‘त्रिक भाव’ (6, 8, 12) की श्रेणी में आता है, जिन्हें आमतौर पर कष्टकारी माना जाता है। परंतु, छठे भाव की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह ‘उपचय भाव’ (3, 6, 10, 11) भी है। ‘उपचय’ का अर्थ है, ‘वृद्धि’। इसका तात्पर्य यह है कि छठे भाव…

ज्योतिष शास्त्र में पाँचवाँ भाव (पंचम भाव) को ‘त्रिकोण भाव’ और ‘लक्ष्मी स्थान’ माना जाता है। इसे ‘पूर्व पुण्य’ का भाव भी कहते हैं, जिसका अर्थ है कि पिछले जन्मों में किए गए अच्छे कर्मों का फल हमें इसी भाव के माध्यम से मिलता है। यदि चौथा भाव ‘मानसिक शांति’ है, तो पाँचवाँ भाव उस…

वैदिक ज्योतिष में चौथे भाव को ‘पाताल भाव’ भी कहा गया है क्योंकि यह कुंडली के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है, जो हमारी गहराई और छिपी हुई जड़ों (Roots) को दर्शाता है। यदि दसवां भाव (करियर) पेड़ की शाखाएं हैं जो दुनिया को दिखती हैं, तो चौथा भाव वह ‘जड़’ है जो पेड़…

परिचय ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली (Birth Chart) का तीसरा भाव (Third House) हमारे साहस (Courage), बोलने और लिखने की क्षमता (Communication & Writing Skills), छोटे भाई-बहन (Siblings), छोटी यात्राएँ (Short Travels) और छोटे प्रयास (Small Efforts) को दर्शाता है।इसे साहस भाव (House of Courage) भी कहा जाता है, क्योंकि यह दिखाता है कि…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का दूसरा भाव (Second House) व्यक्ति की धन (wealth), संपत्ति (property), परिवार (family), भाषण (speech) और मूल्य प्रणाली (values) का प्रतीक माना जाता है। इसे कभी-कभी “धन और परिवार का भाव” (House of Wealth & Family) भी कहा जाता है।दूसरा भाव यह बताता है कि व्यक्ति धन…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का पहला भाव (First House) व्यक्ति के स्वभाव (nature), व्यक्तित्व (personality), शारीरिक रूप (physical appearance), स्वास्थ्य (health) और जीवन दृष्टिकोण (life approach) का प्रतीक होता है। इसे लग्न या मूल भाव (Ascendant / Lagan) भी कहा जाता है।पहला भाव यह बताता है कि व्यक्ति कैसा दिखता है…

वैदिक ज्योतिष में मंगल को ‘भूमिपुत्र’ और ‘ग्रहों का सेनापति’ माना गया है। मंगल हमारी शारीरिक शक्ति, इच्छाशक्ति (Willpower) और किसी कार्य को करने के जुनून का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल का गोचर जीवन में ‘गति’ लाता है। यदि मंगल अनुकूल हो, तो व्यक्ति असंभव कार्य को भी अपने पराक्रम से संभव कर देता है,…

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर का अत्यंत महत्व है, परंतु राहु और केतु का गोचर अन्य ग्रहों की तुलना में अधिक रहस्यमयी और प्रभावशाली माना जाता है। जहाँ अन्य ग्रह भौतिक पिंड हैं, वहीं राहु और केतु केवल गणितीय बिंदु हैं जिन्हें ‘छाया ग्रह’ कहा जाता है। इनका प्रभाव इतना तीव्र होता है कि…

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ‘देवगुरु’ कहा जाता है। यह सौरमंडल का सबसे विशाल और शुभ ग्रह है। सूर्य यदि आत्मा है और चंद्रमा मन, तो गुरु हमारी ‘बुद्धि’ और ‘विवेक’ है। गुरु का गोचर ज्योतिष की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है क्योंकि यह हमारे जीवन में ‘विस्तार’ (Expansion) लाता है।…