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वैदिक ज्योतिष में चौथे भाव को ‘पाताल भाव’ भी कहा गया है क्योंकि यह कुंडली के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है, जो हमारी गहराई और छिपी हुई जड़ों (Roots) को दर्शाता है। यदि दसवां भाव (करियर) पेड़ की शाखाएं हैं जो दुनिया को दिखती हैं, तो चौथा भाव वह ‘जड़’ है जो पेड़…

परिचय ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली (Birth Chart) का तीसरा भाव (Third House) हमारे साहस (Courage), बोलने और लिखने की क्षमता (Communication & Writing Skills), छोटे भाई-बहन (Siblings), छोटी यात्राएँ (Short Travels) और छोटे प्रयास (Small Efforts) को दर्शाता है।इसे साहस भाव (House of Courage) भी कहा जाता है, क्योंकि यह दिखाता है कि…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का दूसरा भाव (Second House) व्यक्ति की धन (wealth), संपत्ति (property), परिवार (family), भाषण (speech) और मूल्य प्रणाली (values) का प्रतीक माना जाता है। इसे कभी-कभी “धन और परिवार का भाव” (House of Wealth & Family) भी कहा जाता है।दूसरा भाव यह बताता है कि व्यक्ति धन…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का पहला भाव (First House) व्यक्ति के स्वभाव (nature), व्यक्तित्व (personality), शारीरिक रूप (physical appearance), स्वास्थ्य (health) और जीवन दृष्टिकोण (life approach) का प्रतीक होता है। इसे लग्न या मूल भाव (Ascendant / Lagan) भी कहा जाता है।पहला भाव यह बताता है कि व्यक्ति कैसा दिखता है…

वैदिक ज्योतिष में मंगल को ‘भूमिपुत्र’ और ‘ग्रहों का सेनापति’ माना गया है। मंगल हमारी शारीरिक शक्ति, इच्छाशक्ति (Willpower) और किसी कार्य को करने के जुनून का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल का गोचर जीवन में ‘गति’ लाता है। यदि मंगल अनुकूल हो, तो व्यक्ति असंभव कार्य को भी अपने पराक्रम से संभव कर देता है,…

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर का अत्यंत महत्व है, परंतु राहु और केतु का गोचर अन्य ग्रहों की तुलना में अधिक रहस्यमयी और प्रभावशाली माना जाता है। जहाँ अन्य ग्रह भौतिक पिंड हैं, वहीं राहु और केतु केवल गणितीय बिंदु हैं जिन्हें ‘छाया ग्रह’ कहा जाता है। इनका प्रभाव इतना तीव्र होता है कि…

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ‘देवगुरु’ कहा जाता है। यह सौरमंडल का सबसे विशाल और शुभ ग्रह है। सूर्य यदि आत्मा है और चंद्रमा मन, तो गुरु हमारी ‘बुद्धि’ और ‘विवेक’ है। गुरु का गोचर ज्योतिष की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जाता है क्योंकि यह हमारे जीवन में ‘विस्तार’ (Expansion) लाता है।…

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मनसो जातकः’ कहा गया है, अर्थात चंद्रमा मन का कारक है। सूर्य यदि आत्मा है, तो चंद्रमा हमारी संवेदनाएं और मानसिक ऊर्जा है। खगोलीय दृष्टि से चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट है और सबसे तीव्र गति से चलने वाला ग्रह है। यही कारण है कि हमारे मूड, विचार और दैनिक…

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ‘ग्रहराज’ (ग्रहों का राजा) और ‘आत्मा’ का कारक माना गया है। सूर्य का गोचर जिसे ‘संक्रांति’ भी कहा जाता है, ज्योतिषीय गणना में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सूर्य ही वह शक्ति है जो अन्य सभी ग्रहों को प्रकाशित करती है। सूर्य हर महीने अपनी राशि बदलता है, जिसे हम ‘महीने’…

ज्योतिष शास्त्र में ‘शनि साढ़ेसाती’ वह समय चक्र है जब न्याय के देवता शनि देव व्यक्ति के पिछले कर्मों का हिसाब-किताब करते हैं। यह डराने का नहीं, बल्कि व्यक्ति को उसकी गलतियों से सीख देकर उसे भविष्य के लिए परिपक्व (Mature) बनाने का समय है। जिस प्रकार सोने को शुद्ध होने के लिए आग में…