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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को ‘मनसो जातकः’ कहा गया है, अर्थात चंद्रमा मन का कारक है। सूर्य यदि आत्मा है, तो चंद्रमा हमारी संवेदनाएं और मानसिक ऊर्जा है। खगोलीय दृष्टि से चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट है और सबसे तीव्र गति से चलने वाला ग्रह है। यही कारण है कि हमारे मूड, विचार और दैनिक…

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ‘ग्रहराज’ (ग्रहों का राजा) और ‘आत्मा’ का कारक माना गया है। सूर्य का गोचर जिसे ‘संक्रांति’ भी कहा जाता है, ज्योतिषीय गणना में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि सूर्य ही वह शक्ति है जो अन्य सभी ग्रहों को प्रकाशित करती है। सूर्य हर महीने अपनी राशि बदलता है, जिसे हम ‘महीने’…

ज्योतिष शास्त्र में ‘शनि साढ़ेसाती’ वह समय चक्र है जब न्याय के देवता शनि देव व्यक्ति के पिछले कर्मों का हिसाब-किताब करते हैं। यह डराने का नहीं, बल्कि व्यक्ति को उसकी गलतियों से सीख देकर उसे भविष्य के लिए परिपक्व (Mature) बनाने का समय है। जिस प्रकार सोने को शुद्ध होने के लिए आग में…

वैदिक ज्योतिष में केतु को एक ‘छाया ग्रह’ माना गया है। राहु यदि सर्प का मुख है, तो केतु सर्प की पूंछ है। केतु के पास मस्तिष्क नहीं है, केवल धड़ है, इसलिए यह तर्क (Logic) पर नहीं बल्कि अंतर्ज्ञान (Intuition) पर चलता है। इसे ‘मोक्षकारक’ ग्रह कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति को सांसारिक…

वैदिक ज्योतिष में शनि (Saturn) को ‘न्यायाधीश’ और ‘कर्मफलदाता’ माना गया है। शनि सौरमंडल के सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं, इसलिए इनका प्रभाव बहुत गहरा और स्थायी होता है। जहाँ अन्य ग्रह सुख और विलासिता की ओर ले जाते हैं, वहीं शनि हमें जीवन की कड़वी सच्चाई, अनुशासन और मेहनत का पाठ…

वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को ‘भार्गव’ और ‘दैत्यगुरु’ (गुरु ऑफ असुर) कहा जाता है। यदि गुरु बृहस्पति ज्ञान और धर्म के शिक्षक हैं, तो शुक्र ग्रह जीवन को जीने की कला, प्रेम और भौतिक सुख-सुविधाओं के शिक्षक हैं। शुक्र हमारी कुंडली में उस ‘मिठास’ और ‘चमक’ का प्रतिनिधित्व करता है जिसके बिना जीवन नीरस…

वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को ‘राजकुमार’ की उपाधि दी गई है। यह सौरमंडल का सबसे छोटा और सूर्य के सबसे निकटतम ग्रह है। बुध हमारी तार्किक क्षमता (Logic), वाणी (Speech), और बुद्धि (Intelligence) का प्रतिनिधित्व करता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध बलवान होता है, वह अपनी बातों से किसी का भी दिल…

वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ‘भूमिपुत्र’ और ‘ग्रहों का सेनापति’ (Commander-in-Chief of Planets) कहा जाता है। यह हमारी शारीरिक ऊर्जा, साहस और इच्छाशक्ति (Willpower) का प्रतिनिधित्व करता है। यदि सूर्य राजा है, तो मंगल वह रक्षक है जो सीमाओं की रक्षा करता है। हमारे भीतर की संघर्ष क्षमता (Fighting spirit) और किसी भी कार्य…

वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) में चंद्र ग्रह को “मनसो जातकः” कहा गया है, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा हमारे मन (Mind) का कारक है। सूर्य यदि हमारी आत्मा (Soul) है, तो चंद्रमा हमारा मन और हमारी भावनाएँ (Emotions) हैं। यह पृथ्वी के सबसे निकट होने के कारण हमारे जीवन, स्वभाव (Nature) और शरीर के तरल…

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को “ग्रहों का राजा” और “जगत की आत्मा” माना गया है। जैसे सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं, वैसे ही हमारी कुंडली के सभी योग सूर्य की शक्ति से ही प्रकाशित होते हैं। सूर्य को ‘पिता’, ‘सत्ता’, और ‘आरोग्य’ का कारक माना जाता है। यह हमारे भीतर के…