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वैदिक ज्योतिष में दसवाँ भाव (दशम भाव) कुंडली का सबसे शक्तिशाली ‘केंद्र स्थान’ माना जाता है। इसे ‘आकाश’ (Mid-heaven/Zenith) भी कहा जाता है क्योंकि यह सूर्य के दोपहर में सबसे अधिक चमकने का स्थान है। ज्योतिषीय भाषा में इसे ‘कर्म भाव’ कहा जाता है। यदि नौवां भाव ‘भाग्य’ है, तो दसवाँ भाव उस भाग्य को…

वैदिक ज्योतिष में नौवें भाव (नवम भाव) को ‘धर्म भाव’ और सबसे महत्वपूर्ण ‘त्रिकोण स्थान’ माना जाता है। यदि कुंडली के अन्य भाव व्यक्ति के पुरुषार्थ और कर्म को दर्शाते हैं, तो नौवां भाव उस ‘ईश्वरीय कृपा’ को दर्शाता है जिसके बिना कठोर परिश्रम भी अधूरा रह जाता है। इसे ‘पिता’ का भाव (पराशर मत…

परिचय (Introduction) जन्म कुंडली के बारह भाव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं। इनमें कुछ भाव बहुत सरल और सीधी बातें बताते हैं, जबकि कुछ भाव काफी गहरे, रहस्यमयी और छिपे हुए विषयों से जुड़े होते हैं। आठवाँ भाव इन्हीं में से एक है।आठवें भाव को अक्सर लोग डर, संकट, दुर्घटनाओं या मृत्यु से…

परिचय (Introduction) जन्म कुंडली में प्रत्येक भाव (House) जीवन के किसी खास क्षेत्र को दर्शाता है। सातवाँ भाव इनमें से एक ऐसा भाव है, जो हमारी सामाजिक और व्यक्तिगत दोनों तरह की साझेदारियों (Partnerships) को बताता है। जहाँ पाँचवाँ भाव प्रेम (Love) को दर्शाता है, वहीं सातवाँ भाव विवाह (Marriage), साथीपन (Companionship), व्यापारिक साझेदारी (Business…

वैदिक ज्योतिष में छठा भाव (षष्ठम भाव) ‘त्रिक भाव’ (6, 8, 12) की श्रेणी में आता है, जिन्हें आमतौर पर कष्टकारी माना जाता है। परंतु, छठे भाव की एक अनूठी विशेषता यह है कि यह ‘उपचय भाव’ (3, 6, 10, 11) भी है। ‘उपचय’ का अर्थ है, ‘वृद्धि’। इसका तात्पर्य यह है कि छठे भाव…

ज्योतिष शास्त्र में पाँचवाँ भाव (पंचम भाव) को ‘त्रिकोण भाव’ और ‘लक्ष्मी स्थान’ माना जाता है। इसे ‘पूर्व पुण्य’ का भाव भी कहते हैं, जिसका अर्थ है कि पिछले जन्मों में किए गए अच्छे कर्मों का फल हमें इसी भाव के माध्यम से मिलता है। यदि चौथा भाव ‘मानसिक शांति’ है, तो पाँचवाँ भाव उस…

वैदिक ज्योतिष में चौथे भाव को ‘पाताल भाव’ भी कहा गया है क्योंकि यह कुंडली के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है, जो हमारी गहराई और छिपी हुई जड़ों (Roots) को दर्शाता है। यदि दसवां भाव (करियर) पेड़ की शाखाएं हैं जो दुनिया को दिखती हैं, तो चौथा भाव वह ‘जड़’ है जो पेड़…

परिचय ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली (Birth Chart) का तीसरा भाव (Third House) हमारे साहस (Courage), बोलने और लिखने की क्षमता (Communication & Writing Skills), छोटे भाई-बहन (Siblings), छोटी यात्राएँ (Short Travels) और छोटे प्रयास (Small Efforts) को दर्शाता है।इसे साहस भाव (House of Courage) भी कहा जाता है, क्योंकि यह दिखाता है कि…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का दूसरा भाव (Second House) व्यक्ति की धन (wealth), संपत्ति (property), परिवार (family), भाषण (speech) और मूल्य प्रणाली (values) का प्रतीक माना जाता है। इसे कभी-कभी “धन और परिवार का भाव” (House of Wealth & Family) भी कहा जाता है।दूसरा भाव यह बताता है कि व्यक्ति धन…

परिचय (Introduction) ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में जन्म कुंडली का पहला भाव (First House) व्यक्ति के स्वभाव (nature), व्यक्तित्व (personality), शारीरिक रूप (physical appearance), स्वास्थ्य (health) और जीवन दृष्टिकोण (life approach) का प्रतीक होता है। इसे लग्न या मूल भाव (Ascendant / Lagan) भी कहा जाता है।पहला भाव यह बताता है कि व्यक्ति कैसा दिखता है…