विराट कोहली और रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास को लगभग एक साल हो चुका है, लेकिन यह फैसला अब भी चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। कई फैंस का मानना रहा है कि यह निर्णय पूरी तरह खिलाड़ियों का नहीं था, बल्कि चयनकर्ताओं या टीम मैनेजमेंट की भूमिका इसमें अहम रही।
अब इस मुद्दे पर भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अश्विन ने इशारों में संकेत दिया कि हेड कोच गौतम गंभीर सीनियर खिलाड़ियों-जिनमें वह खुद, विराट कोहली और रोहित शर्मा शामिल हैं-को आगे बढ़ाने के पक्ष में थे।
अश्विन ने कहा, “अगर किसी को गौतम से शिकायत हो सकती है, तो वह मैं हूं। लेकिन कोच के तौर पर उनका काम है फैसले लेना। अगर उन्हें लगा कि मुझे, विराट या रोहित को आगे बढ़ना चाहिए, तो यह ठीक है-क्योंकि वह अपना काम कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी माना कि उस समय उन्हें यह फैसला कड़वा लग सकता था, लेकिन बाद में समझ आता है कि टीम के भविष्य को देखते हुए ऐसे निर्णय जरूरी होते हैं।
अश्विन ने अपने रिटायरमेंट पर भी की बात
अश्विन ने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान अपने अचानक लिए गए संन्यास पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि टीम में अपनी भूमिका को लेकर मिल रहे संकेतों से उन्हें एहसास हो गया था कि अब उनका समय खत्म हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पर्थ टेस्ट में उन्हें मौका नहीं मिला और वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता दी गई। एडिलेड टेस्ट में वापसी के बाद भी उन्हें फिर बाहर बैठना पड़ा, जिससे उन्हें साफ संकेत मिल गया।
अश्विन ने कहा, “मेरी सबसे बड़ी ताकत फैसले लेने की क्षमता है। यह सही है या गलत, यह लोग तय करें, लेकिन जिंदगी मेरी है और फैसला भी मेरा होना चाहिए। मैं उन लोगों में नहीं हूं जो वापसी के लिए इंतजार करते रहें।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि खिलाड़ियों को अपने अहंकार को किनारे रखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि कोई भी खिलाड़ी अजेय नहीं होता, भले ही उसे कितना ही सम्मान और लोकप्रियता क्यों न मिले।
कोहली, रोहित और अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के लगभग एक साथ टेस्ट क्रिकेट से दूर होने के बाद भारतीय टीम एक नए बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुकी है।




