शुक्रवार (20 मार्च 2026) को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 93.08 पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है।
फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी रुपये की कमजोरी को और गहरा किया है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार की सकारात्मक शुरुआत ने गिरावट को और अधिक तेज होने से कुछ हद तक संभाल लिया।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.92 पर खुला और पहली बार 93 के स्तर को पार करते हुए 93.08 तक फिसल गया। इससे पहले बुधवार (18 मार्च 2026) को रुपया 49 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 92.89 पर बंद हुआ था, जो उस समय का रिकॉर्ड निचला स्तर था।
गुरुवार (19 मार्च) को गुड़ी पड़वा के अवसर पर फॉरेक्स बाजार बंद रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपया दबाव में बना रह सकता है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, “रुपया फिलहाल कमजोर दिख रहा है और इसकी गिरावट को रोकने में केवल आरबीआई ही डॉलर बेचकर सहारा दे रहा है। इसके अलावा, जब सेंसेक्स और निफ्टी 21 महीने के निचले स्तर पर पहुंचे, तब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली जारी रखी।”
इस बीच, डॉलर इंडेक्स – जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है – 0.17% बढ़कर 100.25 पर पहुंच गया। वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा बाजार में 1.64% की गिरावट के साथ 106.9 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, तब तक रुपये में अस्थिरता बनी रह सकती है।




