यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी कानूनी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सांप के जहर और रेव पार्टी से जुड़े मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं था, हालांकि इसे पूरी तरह क्लीन चिट भी नहीं माना जाएगा।
क्यों रद्द हुई FIR?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पाया कि केस में कई कानूनी कमियां थीं:
- NDPS एक्ट के तहत जो पदार्थ बताया गया, वह प्रतिबंधित सूची में ही नहीं था
- एल्विश यादव के पास से कोई रिकवरी नहीं हुई
- आरोप मुख्य रूप से “सुनवाई” और अन्य व्यक्तियों पर आधारित थे
वन्यजीव कानून में भी बड़ी खामी
कोर्ट ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत केस दर्ज करने के लिए अधिकृत अधिकारी की शिकायत जरूरी होती है।
- इस मामले में शिकायत एक NGO (People For Animals) से जुड़े व्यक्ति ने की थी
- इसलिए FIR कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी गई
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया:
- “हम क्लीन चिट नहीं दे रहे”
- अगर कोई अपराध हुआ है तो सक्षम एजेंसियां दोबारा कार्रवाई कर सकती हैं
क्या था पूरा मामला?
एल्विश यादव पर आरोप था कि:
- वीडियो शूट में सांप और उनके जहर का इस्तेमाल हुआ
- रेव पार्टियों में नशीले पदार्थों का उपयोग हुआ
इस मामले को लेकर पहले भी कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी और कहा था कि ऐसे मामलों से समाज में गलत संदेश जा सकता है।
यह फैसला न सिर्फ एल्विश यादव के लिए अहम है, बल्कि सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाने वालों के लिए भी एक बड़ा संकेत है कि कानून के दायरे से बाहर जाकर कुछ भी करना महंगा पड़ सकता है।




