भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। तीन दिनों की तेजी के बाद बाजार ने सीधे गिरावट के साथ शुरुआत की और कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 1700 से ज्यादा अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,200 के नीचे फिसल गया।
ओपनिंग के दौरान ही बाजार से करीब ₹7 लाख करोड़ की मार्केट वैल्यू साफ हो गई, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में नजर आए, खासकर रियल्टी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
इस गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं जो एक साथ बाजार पर दबाव बना रहे हैं।
1. कच्चा तेल $110 के पार, सबसे बड़ा झटका
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें फिर से $110 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। ईरान, कतर और खाड़ी देशों के गैस-ऑयल ठिकानों पर हमलों से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह बेहद नकारात्मक संकेत है, क्योंकि महंगा तेल सीधे महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर डालता है।
2. US Fed का सख्त रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की और साफ संकेत दिया कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने कहा कि वैश्विक हालात और तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। इससे निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं मिली और बाजार पर दबाव बढ़ गया।
3. HDFC Bank में भारी गिरावट
मार्केट की गिरावट में HDFC Bank का बड़ा योगदान रहा। बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे की खबर के बाद शेयर में करीब 8% की गिरावट आई।
HDFC Bank का वेटेज इंडेक्स में काफी ज्यादा है, इसलिए इसके गिरने से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर सीधा असर पड़ा।
4. ग्लोबल मार्केट से कमजोर संकेत
अमेरिका के बाजार पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे। S&P 500, Nasdaq और Dow Jones में 1-1.5% तक की गिरावट देखी गई।
एशियाई बाजारों में भी जापान, कोरिया और हांगकांग के इंडेक्स लाल निशान में रहे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
5. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बुधवार को ही उन्होंने ₹2,700 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की, जो लगातार 14वें दिन जारी रही।
इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों का झुकाव सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
रुपया भी दबाव में
तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती के चलते रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर 92.63 तक गिर गया है। इससे आयात महंगा होगा और बाजार पर और दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होता और तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों के लिए यह समय सावधानी बरतने का है, क्योंकि ग्लोबल संकेत और घरेलू हालात दोनों ही बाजार के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।




