मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) प्लांट पर मिसाइल हमले में भारी नुकसान की खबर है। यह वही प्लांट है जो दुनिया की करीब 20% गैस सप्लाई करता था।
कतर के अधिकारियों के मुताबिक, ईरान की ओर से दागी गई एक मिसाइल इस प्लांट पर आकर गिरी, जबकि चार अन्य मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया। इसके बाद गुरुवार तड़के एक और हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। हालांकि, प्रशासन ने आग पर काबू पाने की बात कही है और सभी कर्मचारियों को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया था।
इस हमले के कुछ ही घंटों बाद अबू धाबी ने भी अपने हबशान गैस प्लांट को बंद कर दिया, क्योंकि इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों के मलबे से वहां खतरा पैदा हो गया था। वहीं सऊदी अरब ने भी अपने गैस प्लांट को निशाना बनाने की कोशिश को नाकाम करने का दावा किया है।
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम तब तेज हुआ जब इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने साफ चेतावनी दी थी कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के ऊर्जा ठिकाने अब उसके निशाने पर हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इजरायल ने गुस्से में आकर ईरान के गैस फील्ड पर हमला किया था, लेकिन अब आगे ऐसे हमले नहीं होंगे-जब तक ईरान दोबारा जवाबी कार्रवाई नहीं करता। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका को इस हमले की पहले से जानकारी नहीं थी और कतर इस विवाद में शामिल नहीं था।
हालांकि, उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी कि अगर उसने फिर से हमला किया, तो अमेरिका बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
इन हमलों का असर अब वैश्विक बाजार पर साफ दिखने लगा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 8% तक उछलकर करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि LNG सप्लाई पर असर पड़ने से एशिया और यूरोप में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी, जो करीब 295 वर्ग किलोमीटर में फैली है, दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोसेसिंग हब्स में से एक है। यहां LNG के अलावा गैस-टू-लिक्विड, स्टोरेज और रिफाइनरी जैसी कई अहम सुविधाएं मौजूद हैं।
इससे पहले भी हमलों के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। कतर एनर्जी पहले ही फोर्स मेज्योर घोषित कर चुकी है, जिससे खरीदारों को वैकल्पिक सप्लाई की तलाश करनी पड़ रही है।
वहीं, सऊदी अरब में हुई बैठक में 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है और तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
कुल मिलाकर, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं जहां ऊर्जा ठिकाने सीधे युद्ध का निशाना बन रहे हैं। अगर यह तनाव जल्द नहीं थमा, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।




